motivational story in hindi for success

1. दो मेंढक  कहानी
एक बार दो मेंढक एक गढ़े में गिर गए दोनों बाहर निकलने के लिए बहोत कोशिश कर रहे थे इतने में वहाँ ऊपर दूसरे मेंढक आ गए फिर उन्होंने कहा की काफी गहरा गढ़ा है ये दोनों कितने भी कोशिश कर ले यह से नही निकल पायंगे इन मेढकों की बात सुन कर एक मेंढक तो आराम से बैठ गया और बोला मेहनत करने से क्या फायदा जब मरना तो है ही लेकिन दूसरा मेंढक अभी भी कोशिश करता रहा वह ऊपर की ओर कूदता रहा उसे देख कर ऊपर के मेंढको ने और जोर जोर से चिलाना सुरु कर दिया की कुछ नही होगा संत से वही मर जा क्यो आपने आप को इतना तकलीफ दे रहा है एक मैन गया तू भी मान जा लेकिन उस मेंढक ने ज्यादा कोसिस करता रहा और ऊपर की ओर कूदता रहा उसने काफी परिश्रम के बाद वहां से निकल गया। अब सबने पता करने की कोशिश की की आखिर इस मेंढक ने हमारी बात क्यो नही मानी तो पता चला की वो मेंढक बहरा था उसे सुनाई नही देता था। जब सब उसे मना कर रहे थे की कोशिश मत कर वही शांत से मर जा तो बहरा मेंढक को लगा की वो लोग उसे बोल रहे है की तू और कोशिश कर तू बाहर आ सकता है और उस मेंढक को हिमत मिलती रही और वो कोसिस करता रहा और वो बाहर निकल गया। जो लोग उसे नकारात्मक बोल रहे थे की तू नही कर पाएगा वही उस बहरे मेंढक ने सकारात्मक समझ कर और वो बाहर आ गया! किसी ने सही कहा है कि कोशिश करने वालो कि कभी हार नही होती।

इस कहानी से हमे दो सिख मिलती है।
We get two learn from in this story.

 पहला सिख हमारी कही हुई बातें लोगो की जीवन बन भी सकती है और बिगड़ भी सकती है इसीलिए हमे लीगो को हिमत देना चाहिए न कि उनका हिमत तोड़ना चाहिए।

दूसरा सिख अगर आपका कोई मजाक उड़ा रहा है, हिमत तोड़ रहा है तो आप उन लोगो के लिए बहरे हो जाव और सिर्फ अपने लक्ष्य पर ही ध्यान दे ना कि लोगो की बात पे दूसरे की कहे हुई बातो से अपने सपने को मत तोड़ो ऐसे लोग के लिए आप बहरे बन जाइये।

motivational story in hindi for student



2.बाबा जी  कहानी
दोस्तो ये कहानी है एक गांव की जीस गांव में बहोत ज्यादा गरीबी थी गांव के लोग खेती करते थे और आपने बाल बच्चों का पेट पालते थे। उसी गांव में रहते थे एक बाबाजी जिनकी उस गांव  बहोत ज्यादा मान्यता थी उस गांव के लोगो का मनना था की जब भी बाबाजी जी नाचते थे तो उस गांव में बारिश होती जाती थी और इस चीज़ को गांव के लोगो ने आपने आंखों से कई बार देखा था जब भी फसल में बारिश की जरूरत होती और बारिश समय पे न होती तो गांव के किसान लोग मिल के इकठा हो के बाबा जी से निवदेन कर के बोलते की बाबाजी आप नाचो क्योकि जब आप नाचोगे तो बारिश होगी अधिकतर बाबाजी उनके बातो को समझ कर नाचा करते और बारिश हो जाया करती थी। यही चीज़ लोगो के अन्दर बाबाजी के प्रति प्रेम और विशवास प्रकट कर दे रही थी की जब भी बाबाजी नाचते है तब बारिश हो जाती है। इसी बीच गांव में कुछ लड़के मुम्बई से घूमने आय थे वहां पर उन्होंने ये बात सुनी किसि से के की जब भी बाबाजी नाचते थे तब बारिश हो जाती थी उन लड़को को पहले ये यकीन नही हुआ की बाबाजी नाचते है तो बारिश होता है फिर उन लड़को ने सोचा की क्यो न बाबा जी से ही मिल लिया जाय फिर लड़को ने गांव के कुछ लोगो को इकठा कर के बाबा जी के पास पहुचे उन्होंने कहा की बाबाजी हम सहर से आय है और आपका ये कला देखना चाहते है। फिर बाबा जी ने कहा की एक काम करो पहले आप लोग नाचिए क्या पता आपकी नाचने से भी बारिश हो जाय उन में से पहला लड़का नाचने लगा जाता है वो 15 से 20 मीनट तक नाचा परंतु बारिश नही हुई वो नाचता रहा उसे नाचते हुए तकरीबन 45 मिनट हो चुके थे परंतु बारिश आब भी नही हो रही थी फिर उन में से दूसरा लड़का नाचना सुरु किया फिर भी बारिश नही हो रही थी तो फिर तीसरा लड़का नाचने लगा फिर भी बारिश नही हो रही थी उन सब लोग नाच के थक चुके थे फिर भी बारिश नही हो रहा थी फिर सब ने मिल कर बाबाजी से बोला की बाबाजी अब आप नाचों बारिश हो जाएगी उन लड़को का विशवास उठ चुका था की अब बाबाजी जी नाचेंगे और बारिश होगी फिर बाबाजी ने नाचना सुरु कर दिया उन्होंने आधा घंटे नाचा मगर बारिश नही हुई फिर भी बाबाजी नाचते रहे उनको नाचते नाचते 2 घंटे हो चुके थे पर बारिश नही हुई फिर भी वो नाचते रहे तकरीबन बाबाजी 7 से 8 घंटे नाचने के बाद शाम में मौसम खराब होने लगी और आंत में बारिश हो ही गई। फिर लड़कव ने आस्चर्य चकित हो के बाबाजी से कहा की बाबाजी आपके अन्दर शक्ति है आपने बारिश करा दी फिर लडको ने बाबाजी के कहा की बाबाजी आप हमे भी समझाय की आप ने बारिश कैसे कराया फिर बाबाजी विनम्रता से कहा की बेटा जब भी मैं नाचता हु तो आपने मन में सोच लेता हु की जब भी मैं नाचूंगा तो बारिश होगी लेकिन मैं तब तक नाचता रहूँगा जब तक बारिश नही हो जाती बारिश होने में चाहे मुझे 1 दिन या 10 दिन क्यो न नाचना पड़े मैं तब तक नाचूंगा जब तक बारिश हो नही जाती है अगर 15 दिनों तक बारिश नही होगी तब मैं 15 दिनों तक नाचता रहूँगा।

इस कहानी से हमे सिख मिलती है।
We get learn from in this story.

इस कहानी से हमे ये सिख मिलती है अगर हमे सफलता पानी है तो पहले हमे मान लेना है की सफलता मिले ही मिले गी अगर मैं अपना जी जान लगा के धैर्य से काम करूँगा तो हमे सफलता मिल जाती है। एक कहावत है की किसी भी चीज़ को अगर हम पूरे सिद्धात से चाहे तो पूरा कायनात हमारी मदद करती हमे उस चीज़ से मिलने में। हमे अपने आप से कहना चाहिए की मुझे जब तक सफलता नही मिलती मैं तब तक काम करता ही रहूँगा मैं आपने 100% मेहनत देना बन्द नही करूँगा  अपने जीवन में काम करते रहो एक न एक दिन सफलता तुम्हारि होगी। 

 

3.दोस्तो ये कहानी है एक गांव की जीस गांव में बहोत ज्यादा गरीबी थी गांव के लोग खेती करते थे और आपने बाल बच्चों का पेट पालते थे। उसी गांव में रहते थे एक बाबाजी जिनकी उस गांव बहोत ज्यादा मान्यता थी उस गांव के लोगो का मनना था की जब भी बाबाजी जी नाचते थे तो उस गांव में बारिश होती जाती थी और इस चीज़ को गांव के लोगो ने आपने आंखों से कई बार देखा था जब भी फसल में बारिश की जरूरत होती और बारिश समय पे न होती तो गांव के किसान लोग मिल के इकठा हो के बाबा जी से निवदेन कर के बोलते की बाबाजी आप नाचो क्योकि जब आप नाचोगे तो बारिश होगी अधिकतर बाबाजी उनके बातो को समझ कर नाचा करते और बारिश हो जाया करती थी। यही चीज़ लोगो के अन्दर बाबाजी के प्रति प्रेम और विशवास प्रकट कर दे रही थी की जब भी बाबाजी नाचते है तब बारिश हो जाती है। इसी बीच गांव में कुछ लड़के मुम्बई से घूमने आय थे वहां पर उन्होंने ये बात सुनी किसि से के की जब भी बाबाजी नाचते थे तब बारिश हो जाती थी उन लड़को को पहले ये यकीन नही हुआ की बाबाजी नाचते है तो बारिश होता है फिर उन लड़को ने सोचा की क्यो न बाबा जी से ही मिल लिया जाय फिर लड़को ने गांव के कुछ लोगो को इकठा कर के बाबा जी के पास पहुचे उन्होंने कहा की बाबाजी हम सहर से आय है और आपका ये कला देखना चाहते है। फिर बाबा जी ने कहा की एक काम करो पहले आप लोग नाचिए क्या पता आपकी नाचने से भी बारिश हो जाय उन में से पहला लड़का नाचने लगा जाता है वो 15 से 20 मीनट तक नाचा परंतु बारिश नही हुई वो नाचता रहा उसे नाचते हुए तकरीबन 45 मिनट हो चुके थे परंतु बारिश आब भी नही हो रही थी फिर उन में से दूसरा लड़का नाचना सुरु किया फिर भी बारिश नही हो रही थी तो फिर तीसरा लड़का नाचने लगा फिर भी बारिश नही हो रही थी उन सब लोग नाच के थक चुके थे फिर भी बारिश नही हो रहा थी फिर सब ने मिल कर बाबाजी से बोला की बाबाजी अब आप नाचों बारिश हो जाएगी उन लड़को का विशवास उठ चुका था की अब बाबाजी जी नाचेंगे और बारिश होगी फिर बाबाजी ने नाचना सुरु कर दिया उन्होंने आधा घंटे नाचा मगर बारिश नही हुई फिर भी बाबाजी नाचते रहे उनको नाचते नाचते 2 घंटे हो चुके थे पर बारिश नही हुई फिर भी वो नाचते रहे तकरीबन बाबाजी 7 से 8 घंटे नाचने के बाद शाम में मौसम खराब होने लगी और आंत में बारिश हो ही गई। फिर लड़कव ने आस्चर्य चकित हो के बाबाजी से कहा की बाबाजी आपके अन्दर शक्ति है आपने बारिश करा दी फिर लडको ने बाबाजी के कहा की बाबाजी आप हमे भी समझाय की आप ने बारिश कैसे कराया फिर बाबाजी विनम्रता से कहा की बेटा जब भी मैं नाचता हु तो आपने मन में सोच लेता हु की जब भी मैं नाचूंगा तो बारिश होगी लेकिन मैं तब तक नाचता रहूँगा जब तक बारिश नही हो जाती बारिश होने में चाहे मुझे 1 दिन या 10 दिन क्यो न नाचना पड़े मैं तब तक नाचूंगा जब तक बारिश हो नही जाती है अगर 15 दिनों तक बारिश नही होगी तब मैं 15 दिनों तक नाचता रहूँगा।

इस कहानी से हमे ये सिख मिलती है अगर हमे सफलता पानी है तो पहले हमे मान लेना है की सफलता मिले ही मिले गी अगर मैं अपना जी जान लगा के धैर्य से काम करूँगा तो हमे सफलता मिल जाती है। एक कहावत है की किसी भी चीज़ को अगर हम पूरे सिद्धात से चाहे तो पूरा कायनात हमारी मदद करती हमे उस चीज़ से मिलने में। हमे अपने आप से कहना चाहिए की मुझे जब तक सफलता नही मिलती मैं तब तक काम करता ही रहूँगा मैं आपने 100% मेहनत देना बन्द नही करूँगा अपने जीवन में काम करते रहो एक न एक दिन सफलता तुम्हारि होगी।

6+motivational story in hindi for success

4.कहानी
बूढ़ी काकी

ये कहानी है बूढ़ी काकी की जिनके पति बहोत पहले ही स्वर्ग सिधार चुके थे जिनके बेटे भी जवान हो कर चल बेस थे। उनका एक भतीजा था बुधिराम बूढ़ी काकी ने अपना पूरा सम्पत्ति अपने भतीजे के नाम कर दी थी सम्पति लिखते समय भतीजे ने वादा किया था की वह बूढ़ी काकी की पूरी अच्छी तरह से ख़्याल रखेगा किन्तु वह अपने जवान का पक्का नही रहा उसकी पत्नी रूपा का बेवहार भी काकी के साथ अच्छा नही था। बूढ़ी काकी को वो लोग समय पे भोजन भी नही देते थे किसी ने सही कहा है बुढापा में आदमी का बचपन लौट आता है यही हाल बूढ़ी काकी का हो गया था उन्हें समय पे भोजन न मिलता और बाजार से आई हुई चीज़े भी नही मिलती तो काकी गाला फाड़ कर रोने लगती थी उनकी खाने की लालच बढ़ती गई भतीजे के बच्चे भी अपने माता पिता के रंग देख कर बूढ़ी काकी को सताया करते कोई काकी को छुटी काट के भागता तो कोई काकी पे कुली कर देता काकी चीख चीख कर रोती बुधिराम की छोटी और उस परिवार की लाडली लड़की ही केवल बूढ़ी काकी के प्रति प्रेम रखती थी। एक बार की बात है बुधिराम के बड़े लड़के का तिलक था द्वार पे सहनाई बज रही थी चारपाई पे मेहमान विश्राम कर रहे थे घर की स्त्रियां गा रही थी भाठी पे कराह चढ़े हुआ थे पुरिया ताली जा रही थी तरह तरह की पकवान बन रहे थे मसले दर सब्जी बन रही थी पकवान का सुगंध चारो तरफ फैला हुआ था बूढ़ी काकी अपने कोठारी में बैठी थी भोजन की खुशबू उनकी नाक तक पहुच रही थी काकी ने मन ही मन बोली आह कितनी कितनी स्वादिस्ट सुगंध आ रही है अब मुझे को पूछता रोटियां ही नही मिलती तो एसा भाग्य कहा की पुरिया मिलेंगी बूढ़ी काकी से रहा नही गया वह धीरे धीरे सरकते हुई बड़ी कठिनाई से चौकठ उत्तरी और धीरे धीरे रेंगती हुई कराह के पास आ गई रूप तैयारियां में वेयस्त थी उसे सांस लेने का भी फुरसत न थी सुबह से ही आराम नही मिला था। वह गुस्से में थी तभी उसी अवस्था में काकी को कराह के पास देखा तो उसका गुस्सा और बढ़ गया और रूप ने गुस्से में काकी को दोनों हाथो से झटकते हुए बोली की एसे पेट में आग लगे ये पेट है या भांड कोठारी में बैठते हुए दम घुट रहा था अभी मेहमानों ने नही खाया अभी भगवान को भोग नही लगा टैब तक धर्य न हो सका आ कर छाती पर सवार हो गई भला चाहती हो तो कोठारी में जा के बैठ जाव जब घर के लोग खाने लगेंगे तो आ के खा लेना तुम कोई देवी देवता होकी तुम्हारी पूजा पहले ही हो जाय बूढ़ी काकी अपने बूढ़ी काकी अपने कोठारी में लौट आई और उन्हें अपने जल्दबाज़ी पे पशताप हो रहा था तब उन्होने सोचा जब तक कोई बुलावा न आएगा तब तक न जाऊंगी वह मन ही मन बुलावे की प्रतीक्षा करने लगी काकी का एक एक पल एक युग के बरब बित रहा था। वो गुनगुनाने लगी कुछ देर बाद उन्हें लगा की गुनगुनाते हुए बहोत समय बीत गए किसी की आवाज भी नही सुनाई पड़ रही थी वो मन ही मन बोली की अवश्य ही लोग खा पी कर चले गए होंगे मुझे किसी ने नही बुलाया ये सब सोच ही रही थी फिर मन ही मन बोली रुपा सोचती होगी की मैं कोईं मेहमान तो बहु नही की मुझे कोई बुलाने आएगा बूढ़ी काकी चलने को तैयार हो गई।

5.संघर्ष आपको मजबूत बनाएगा

एक बार की बात है, एक आदमी को एक तितली मिली जो अपने कोकून से निकलने लगी थी। वह बैठ गया और घंटों तक तितली को देखता रहा क्योंकि वह एक छोटे से छेद के माध्यम से खुद को मजबूर करने के लिए संघर्ष कर रही थी। फिर, इसने अचानक प्रगति करना बंद कर दिया और ऐसा लग रहा था कि यह अटका हुआ है। इसलिए, आदमी ने तितली की मदद करने का फैसला किया। उसने कैंची की एक जोड़ी ली और कोकून के शेष हिस्से को काट दिया। तितली तब आसानी से निकली, हालाँकि उसका शरीर सूजा हुआ था और छोटे, सिकुड़े हुए पंख थे। उस आदमी ने इसके बारे में कुछ नहीं सोचा, और वह वहीं बैठकर तितली को सहारा देने के लिए पंखों के बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहा था। हालांकि, ऐसा कभी नहीं हुआ। तितली ने अपना शेष जीवन उड़ने में असमर्थ, छोटे पंखों और सूजे हुए शरीर के साथ रेंगते हुए बिताया। आदमी के दयालु हृदय के बावजूद, वह यह नहीं समझ पाया कि सीमित कोकून और छोटे छेद के माध्यम से खुद को प्राप्त करने के लिए तितली द्वारा आवश्यक संघर्ष एक बार उड़ने के लिए खुद को तैयार करने के लिए तितली के शरीर से तरल पदार्थ को अपने पंखों में मजबूर करने का भगवान का तरीका था। यह मुफ़्त था।”

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6.अतीत की एक भी असफलता को भविष्य में कभी भी पीछे न आने दें

जैसे ही एक आदमी हाथियों के पास से गुजर रहा था, वह अचानक रुक गया, इस तथ्य से भ्रमित होकर कि इन विशाल जीवों को केवल उनके सामने के पैर से बंधी एक छोटी सी रस्सी से पकड़ा जा रहा था। कोई जंजीर नहीं, कोई पिंजरा नहीं। यह स्पष्ट था कि हाथी कभी भी, अपने बंधनों को तोड़ सकते थे, लेकिन किसी कारण से, उन्होंने ऐसा नहीं किया। उसने पास में एक प्रशिक्षक को देखा और पूछा कि ये जानवर बस वहीं खड़े क्यों हैं और उसने दूर जाने का कोई प्रयास नहीं किया। ‘ठीक है,’ ट्रेनर ने कहा, ‘जब वे बहुत छोटे होते हैं और बहुत छोटे होते हैं तो हम उन्हें बांधने के लिए एक ही आकार की रस्सी का उपयोग करते हैं और उस उम्र में, उन्हें पकड़ने के लिए पर्याप्त है। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उन्हें विश्वास होता है कि वे अलग नहीं हो सकते। उनका मानना ​​है कि रस्सी अभी भी उन्हें पकड़ सकती है, इसलिए वे कभी भी मुक्त होने की कोशिश नहीं करते।’ वह आदमी चकित था। ये जानवर किसी भी समय अपने बंधनों से मुक्त हो सकते हैं, लेकिन क्योंकि उनका मानना ​​​​था कि वे नहीं कर सकते, वे वहीं फंस गए जहां वे थे।

 

 

 

 

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